ऊर्जा क्रांति की ओर एक बड़ा कदम
मध्य प्रदेश सरकार ने 13 जनवरी 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में राज्य को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए तीन विशाल सोलर-कम-स्टोरेज परियोजनाओं को हरी झंडी दी है। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा की अनिश्चितता को दूर करना है, क्योंकि अक्सर बादल होने या रात के समय सौर ऊर्जा उपलब्ध नहीं होती। इस नई तकनीक के माध्यम से दिन के समय उत्पन्न होने वाली बिजली को उन्नत बैटरी सिस्टम में स्टोर किया जाएगा, जिसे जरूरत के समय ग्रिड में वापस भेजा जा सकेगा। यह कदम न केवल राज्य की बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करेगा, बल्कि कोयले पर निर्भरता को कम कर पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ी भूमिका निभाएगा।
4-घंटे स्टोरेज वाली 300 मेगावाट की परियोजना
पहली प्रमुख परियोजना 300 मेगावाट की सौर ऊर्जा क्षमता के साथ 4 घंटे के ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) पर आधारित है। इस परियोजना का डिजाइन विशेष रूप से उन घंटों के लिए तैयार किया गया है जब सूरज ढलने के बाद बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है (पीक डिमांड आवर्स)। 4 घंटे का बैकअप यह सुनिश्चित करेगा कि शाम के समय जब औद्योगिक और घरेलू मांग सबसे अधिक होती है, तब राज्य को बाहरी बिजली स्रोतों या महंगे थर्मल पावर पर निर्भर न रहना पड़े। यह परियोजना तकनीकी रूप से इतनी सक्षम होगी कि यह बिजली के वोल्टेज को स्थिर रखने में भी मदद करेगी।
6-घंटे बैकअप के साथ निर्बाध बिजली आपूर्ति
कैबिनेट ने एक और 300 मेगावाट की परियोजना को मंजूरी दी है, जिसमें 6 घंटे का स्टोरेज बैकअप प्रदान किया जाएगा। यह मध्य प्रदेश की अब तक की सबसे लंबी बैकअप अवधि वाली स्टोरेज परियोजनाओं में से एक होगी। इस परियोजना का लक्ष्य रात के समय भी सौर ऊर्जा का लाभ पहुंचाना है। 6 घंटे का विशाल स्टोरेज यह सुनिश्चित करेगा कि मध्य प्रदेश के बड़े शहरों और ग्रामीण इलाकों में देर रात तक सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरणों को बिजली मिलती रहे। यह परियोजना विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगी जहां रात में कृषि कार्यों के लिए बिजली की निरंतर आवश्यकता होती है।
24-घंटे निरंतर सौर ऊर्जा का 200 मेगावाट प्रोजेक्ट
सबसे महत्वपूर्ण और तकनीकी रूप से उन्नत तीसरी परियोजना 200 मेगावाट की है, जिसे ‘राउंड-द-क्लॉक’ (24×7) सौर ऊर्जा प्रदाय के लिए तैयार किया गया है। यह देश की कुछ चुनिंदा परियोजनाओं में से एक होगी जो 24 घंटे लगातार बिजली देने में सक्षम होगी। इसका मतलब है कि यह प्रोजेक्ट केवल सूरज की रोशनी पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि इसकी बैटरी प्रणाली इतनी शक्तिशाली होगी कि वह रात भर स्थिर दर से बिजली की आपूर्ति जारी रखेगी। यह परियोजना मध्य प्रदेश को रिन्यूएबल एनर्जी (RE) के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाएगी और राज्य की बेस-लोड क्षमता को बढ़ाएगी।
ऐतिहासिक ₹2.70 प्रति यूनिट का टैरिफ और आर्थिक लाभ
इन परियोजनाओं की सबसे बड़ी विशेषता इनकी कम लागत और किफायती बिजली दरें हैं। हाल ही में मुरैना जैसे प्रोजेक्ट्स में देखा गया है कि ‘सोलर-प्लस-स्टोरेज’ तकनीक के माध्यम से बिजली की दर ₹2.70 प्रति यूनिट तक कम हो गई है। कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई ये तीनों नई परियोजनाएं भी इसी तर्ज पर काम करेंगी, जिससे आम उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में भविष्य में कमी आने की संभावना है। इसके अलावा, इन परियोजनाओं के निर्माण और संचालन से स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं को तकनीकी और गैर-तकनीकी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
स्पेस-टेक और भविष्य की ऊर्जा दृष्टि
इन सोलर प्रोजेक्ट्स को ‘स्पेस-टेक नीति 2026’ के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, जिसे इसी कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिली है। सौर पैनलों की निगरानी और दक्षता बढ़ाने के लिए सैटेलाइट डेटा और ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। मध्य प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक राज्य की 50% बिजली जरूरतें नवीकरणीय ऊर्जा से पूरी हों। ये तीन स्टोरेज प्रोजेक्ट्स इसी बड़े लक्ष्य की आधारशिला हैं। यह न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करेगा बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और हरित मध्य प्रदेश का निर्माण करेगा, जहाँ बिजली की कमी एक पुरानी बात हो जाएगी।
क्या आप इन परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित जिलों या इनके टेंडर प्रक्रिया के बारे में अधिक जानकारी जानना चाहेंगे?
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