संकट में अन्नदाता: ओलावृष्टि से फसलों पर बरसी आफत, सरकार ने युद्धस्तर पर शुरू किया सर्वे

कुदरत का कहर और किसानों की चिंता

भोपाल संभाग सहित मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम ने जो करवट ली, उसने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। जनवरी के अंत में हुई इस बेमौसम बारिश और भारी ओलावृष्टि ने खेतों में लहलहाती गेहूं, चना और सरसों की फसलों को सीधा नुकसान पहुंचाया है। विशेष रूप से भोपाल के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों जैसे बैरसिया और फंदा में ओलों की चादर बिछ गई, जिससे रबी की तैयार फसलों के दाने झड़ गए और पौधे जमीन पर बिछ गए। किसानों के लिए यह समय फसल की कटाई और परिपक्वता का होता है, ऐसे में कुदरत की यह मार उनके साल भर के परिश्रम पर पानी फेरने जैसी है।

मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश और प्रशासनिक तत्परता

हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तत्काल प्रभाव से भोपाल संभाग के कमिश्नर और सभी जिला कलेक्टरों को व्यापक सर्वे के निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन को स्पष्ट किया गया है कि नुकसान का आकलन करने में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे स्वयं खेतों में उतरें और प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करें। सरकार का लक्ष्य है कि नुकसान की रिपोर्ट जल्द से जल्द तैयार की जाए ताकि राहत राशि वितरण की प्रक्रिया में कोई विलंब न हो। यह कदम किसानों को मानसिक संबल देने और उन्हें आर्थिक सुरक्षा का भरोसा दिलाने के लिए उठाया गया है।

‘आरबीसी 6-4’ के तहत पारदर्शी सर्वे प्रक्रिया

फसल नुकसान के सर्वे के लिए ‘राजस्व पुस्तक परिपत्र’ (RBC 6-4) के कड़े प्रावधानों का पालन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पटवारियों, कृषि विस्तार अधिकारियों और पंचायत सचिवों की एक संयुक्त टीम बनाई गई है। यह टीम हर खेत का पंचनामा तैयार करेगी, जिसमें फसल के प्रकार और नुकसान के प्रतिशत का सटीक विवरण होगा। सर्वे के दौरान फोटो और वीडियो ग्राफी को भी अनिवार्य किया गया है ताकि किसी भी तरह की विसंगति से बचा जा सके। भोपाल जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों की 33 प्रतिशत से अधिक फसल खराब हुई है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर मुआवजा सूची में शामिल किया जाएगा।

तकनीक का उपयोग और आधुनिक मॉनिटरिंग

2026 के इस दौर में सरकार नुकसान के सटीक आकलन के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है। रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट डेटा और ड्रोन्स का उपयोग उन दुर्गम क्षेत्रों में किया जा रहा है जहाँ भौतिक रूप से पहुँचना कठिन है। भोपाल स्थित राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम से सीधे खेतों की लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने एक विशेष पोर्टल भी सक्रिय किया है, जहाँ किसान स्वयं अपने खेत के नुकसान की तस्वीरें अपलोड कर सकते हैं। यह डिजिटल पहल न केवल भ्रष्टाचार की गुंजाइश को खत्म करती है, बल्कि सर्वे की गति को भी तीन गुना तक बढ़ा देती है, जिससे राहत राशि सीधे आधार-लिंक्ड खातों में पहुँचेगी।

बीमा कंपनियों को सख्त हिदायत

राजस्व विभाग के साथ-साथ ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ (PMFBY) के अंतर्गत आने वाली बीमा कंपनियों को भी सक्रिय कर दिया गया है। भोपाल संभाग के हजारों किसान इस योजना के दायरे में आते हैं, इसलिए बीमा कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने सर्वेक्षकों को तुरंत फील्ड पर भेजें। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि बीमा कंपनियों ने दावों के निपटान में देरी की या किसानों को प्रक्रियात्मक उलझनों में फंसाया, तो उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का प्रयास है कि सरकारी सहायता और बीमा क्लेम, दोनों का लाभ पीड़ित किसान को कम से कम समय में मिल सके ताकि वह अगली बुवाई की तैयारी कर सके।

राहत शिविर और किसान हेल्पलाइन

सर्वे के साथ-साथ प्रशासन ने प्रभावित गांवों में विशेष सहायता शिविर भी लगाए हैं। भोपाल कलेक्ट्रेट में एक समर्पित ‘किसान हेल्पलाइन नंबर’ जारी किया गया है, जहाँ किसान अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं और सर्वे की स्थिति जान सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों की टीमें भी खेतों का दौरा कर रही हैं ताकि किसानों को यह सलाह दी जा सके कि बची हुई फसलों को फंगस या सड़न से कैसे बचाया जाए। सरकार ने आश्वासन दिया है कि संकट की इस घड़ी में वह पूरी तरह से अन्नदाताओं के साथ खड़ी है। मुआवजे की पहली किस्त फरवरी के प्रथम सप्ताह तक जारी करने की योजना है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को इस अचानक आए झटके से उबरने में मदद मिलेगी।

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