बोर्ड परीक्षाओं के लिए सरकार का सख्त कदम
मध्य प्रदेश सरकार ने आगामी 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे प्रदेश में अत्यावश्यक सेवा संधारण अधिनियम (ESMA) लागू कर दिया है। इसके तहत शिक्षा विभाग के करीब 3.5 लाख शिक्षक और कर्मचारी अब इस विशेष कानून के दायरे में आ गए हैं। शासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षाओं के दौरान स्टाफ की कमी न हो और पूरी प्रक्रिया निर्बाध रूप से संपन्न हो सके।
तीन महीने तक लागू रहेगी पाबंदी
जारी आदेश के अनुसार, प्रदेश में एस्मा की यह व्यवस्था 1 फरवरी 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी। इस अवधि के दौरान शिक्षकों और स्कूल शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को किसी भी प्रकार का अवकाश (चाइल्ड केयर लीव सहित) नहीं दिया जाएगा। यदि किसी कर्मचारी को पहले से छुट्टी स्वीकृत भी थी, तो उसे भी तत्काल प्रभाव से निरस्त माना जाएगा।
परीक्षा ड्यूटी से इनकार अब होगा अपराध
एस्मा लागू होने के बाद अब कोई भी शिक्षक या कर्मचारी परीक्षा से जुड़े किसी भी कार्य जैसे—परीक्षा केंद्र पर पर्यवेक्षण (Invigilation), उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन, या प्रबंधन कार्यों से इनकार नहीं कर सकेगा। यदि कोई भी शिक्षक आदेश की अवहेलना करता है या ड्यूटी में बाधा उत्पन्न करता है, तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा और उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्यवाही भी की जा सकती है।
7 फरवरी से शुरू हो रहा परीक्षाओं का महाकुंभ
माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) द्वारा आयोजित इस वर्ष की बोर्ड परीक्षाएं 7 फरवरी 2026 से शुरू होने जा रही हैं। हाईस्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) की इन परीक्षाओं में प्रदेश भर के लगभग 17 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे। परीक्षाओं के सफल आयोजन के लिए राज्य भर में लगभग 4,000 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहाँ बड़ी संख्या में मैनपावर की आवश्यकता होगी।
हड़ताल और प्रदर्शनों पर भी लगेगी रोक
इस अधिनियम के लागू होने का एक महत्वपूर्ण प्रभाव यह भी है कि इस दौरान शिक्षक संगठन किसी भी तरह की हड़ताल, धरना या प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे। पिछले कुछ समय से वेतन वृद्धि और अन्य मांगों को लेकर शिक्षकों के आंदोलनों की सुगबुगाहट थी, जिसे देखते हुए प्रशासन ने परीक्षा कार्य को ‘अत्यावश्यक सेवा’ घोषित कर दिया है ताकि छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो।
मूल्यांकन और परिणाम समय पर देने की तैयारी
सरकार केवल परीक्षा संचालन ही नहीं, बल्कि मूल्यांकन प्रक्रिया को भी समय पर पूरा करना चाहती है। 30 अप्रैल तक एस्मा प्रभावी रहने का मतलब है कि मार्च में परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद शिक्षकों को कॉपियों की जांच के कार्य में लगाया जाएगा। शासन की योजना है कि इस बार परीक्षाओं के परिणाम पिछली बार की तुलना में जल्दी घोषित किए जाएं, ताकि छात्र उच्च शिक्षा के लिए समय पर आवेदन कर सकें।
















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