भोपाल की हरियाली पर संकट: NGT ने कचरा प्रबंधन की विफलता पर कसी नकेल

भानपुर और आदमपुर छावनी के कचरा ढेरों पर कड़ी आपत्ति

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की केंद्रीय पीठ ने भोपाल के भानपुर खंती और आदमपुर छावनी स्थित डंपिंग साइट्स की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ट्रिब्यूनल ने पाया कि वर्षों से जमा कचरे के पहाड़ों (Legacy Waste) का निस्तारण वैज्ञानिक पद्धति से नहीं किया जा रहा है। एनजीटी ने स्पष्ट किया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का पालन करना नगर निगम के लिए वैकल्पिक नहीं बल्कि अनिवार्य है। कचरे के इन ढेरों से निकलने वाली दुर्गंध और जहरीली गैसें न केवल पर्यावरण को प्रदूषित कर रही हैं, बल्कि आसपास की सघन आबादी वाले क्षेत्रों में रहने वाले हज़ारों नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन गई हैं।

लीचेट प्रबंधन में लापरवाही और भूजल प्रदूषण का खतरा

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि डंपिंग साइट्स से निकलने वाला ‘लीचेट’ (कचरे से रिसने वाला गंदा पानी) जमीन के भीतर रिस रहा है, जिससे आसपास के क्षेत्रों का भूजल खतरनाक स्तर तक प्रदूषित हो चुका है। ट्रिब्यूनल ने सख्त लहजे में कहा कि यदि लीचेट का उपचार तत्काल प्रभाव से शुरू नहीं किया गया, तो यह भोपाल के बड़े जल स्रोतों तक पहुंच सकता है। एनजीटी ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे लीचेट ट्रीटमेंट प्लांट (LTP) की कार्यक्षमता की जांच करें और एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें कि दूषित पानी को मिट्टी और जल स्रोतों में मिलने से रोकने के लिए अब तक क्या पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

‘वेस्ट-टू-एनर्जी’ प्लांट की धीमी गति पर नाराजगी

भोपाल में प्रस्तावित और निर्माणाधीन ‘वेस्ट-टू-एनर्जी’ परियोजनाओं की कछुआ चाल पर एनजीटी ने नगर निगम और संबंधित ठेकेदारों को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि केवल कागजों पर योजनाएं बनाने से शहर साफ नहीं होगा; इसके लिए धरातल पर क्रियान्वयन की आवश्यकता है। ट्रिब्यूनल ने कचरे से बिजली बनाने की प्रक्रिया में हो रही देरी के कारणों का ब्योरा मांगा है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर प्लांट की क्षमता में सुधार नहीं हुआ, तो नगर निगम पर भारी ‘पर्यावरण मुआवजा’ (Environmental Compensation) लगाया जाएगा, जिसकी जवाबदेही सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों की तय की जाएगी।

डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और सेग्रीगेशन की विफलता

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की पहली कड़ी यानी स्रोत पर कचरे का पृथक्करण (Segregation at Source) भोपाल के कई वार्डों में विफल साबित हो रहा है। एनजीटी ने कहा कि गीला और सूखा कचरा अलग-अलग न किए जाने के कारण डंपिंग साइट्स पर प्रसंस्करण (Processing) जटिल हो जाता है। ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया है कि नगर निगम घर-घर जाकर कचरा इकट्ठा करने वाली गाड़ियों में अनिवार्य रूप से अलग-अलग डिब्बे सुनिश्चित करे और नागरिकों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाए। नियमों के मुताबिक, जो हाउसिंग सोसायटियों या बल्क वेस्ट जनरेटर कचरा अलग नहीं कर रहे हैं, उन पर सख्त जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू करने के भी आदेश दिए गए हैं।

पर्यावरण मुआवजे और व्यक्तिगत जिम्मेदारी का अल्टीमेटम

सुनवाई के दौरान जस्टिस और विशेषज्ञ सदस्यों की पीठ ने संकेत दिया कि यदि अगले 3 महीनों के भीतर कचरा निष्पादन की दर में 50% से अधिक का सुधार नहीं देखा गया, तो नगर निगम के खाते से करोड़ों रुपये का जुर्माना काटा जाएगा। एनजीटी ने इस बात पर जोर दिया कि अब केवल चेतावनी का समय निकल चुका है और अब सीधे एक्शन की बारी है। ट्रिब्यूनल ने मुख्य सचिव और नगर निगम आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए आवंटित बजट का उपयोग केवल प्रदूषण नियंत्रण के कार्यों में ही हो, अन्यथा इसे प्रशासनिक विफलता माना जाएगा।

वायु गुणवत्ता और धूल नियंत्रण के लिए विशेष निर्देश

कचरा प्रबंधन के साथ-साथ एनजीटी ने भोपाल की गिरती वायु गुणवत्ता (AQI) पर भी संज्ञान लिया है। डंपिंग साइट्स पर लगने वाली आग और उससे निकलने वाले धुएं को रोकने के लिए वहां फायर फाइटिंग सिस्टम और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी बढ़ाने को कहा गया है। साथ ही, कचरा परिवहन करने वाले वाहनों को पूरी तरह से ढक कर चलाने का निर्देश दिया गया है ताकि सड़कों पर गंदगी न फैले। ट्रिब्यूनल ने जिला प्रशासन को एक ‘एक्शन प्लान’ तैयार करने का आदेश दिया है, जिसके तहत शहर के हॉटस्पॉट क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने के लिए स्मॉग टावर्स और वॉटर स्प्रिंकलर के उपयोग पर विचार किया जा सके।

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