विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह
भोपाल के जिंसी स्थित नगर निगम के स्लॉटर हाउस (कसाईखाना) में पिछले दिनों गोमांस तस्करी और अवैध कटान का मामला सामने आया था। इस घटना ने शहर में सांप्रदायिक और राजनीतिक तनाव पैदा कर दिया है। बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों का आरोप है कि नगर निगम प्रशासन की नाक के नीचे यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा था। इसी आक्रोश के चलते कार्यकर्ताओं ने महापौर मालती राय के आधिकारिक निवास का घेराव करने का निर्णय लिया। कार्यकर्ताओं का मानना है कि इतनी बड़ी घटना बिना प्रशासनिक मिलीभगत के संभव नहीं है, जिसके लिए सीधे तौर पर महापौर जिम्मेदार हैं।
सुरक्षा घेरा तोड़ बंगले में प्रवेश
गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता महापौर आवास पहुंचे। प्रदर्शन इतना उग्र था कि कार्यकर्ताओं ने पुलिस द्वारा लगाए गए पहले सुरक्षा घेरे को बड़ी आसानी से तोड़ दिया। ‘जय श्री राम’ के नारों के साथ प्रदर्शनकारी बंगले के मुख्य गेट तक जा पहुंचे। पुलिस बल ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन भीड़ के दबाव के आगे सुरक्षा व्यवस्था बौनी नजर आई। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी झड़प भी हुई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
पोस्टर पर कालिख और इस्तीफे की मांग
प्रदर्शनकारियों का गुस्सा उस समय चरम पर पहुंच गया जब उन्होंने महापौर मालती राय के नाम की पट्टिका और वहां लगे पोस्टरों पर कालिख पोत दी। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि महापौर शहर की धार्मिक भावनाओं की रक्षा करने में विफल रही हैं। प्रदर्शन के दौरान “महापौर इस्तीफा दो” के नारे गूंजते रहे। बजरंग दल के नेताओं का कहना है कि जब तक इस मामले में बड़ी कार्रवाई नहीं होती और महापौर अपने पद से त्यागपत्र नहीं देतीं, उनका आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। कालिख पोतने की इस घटना ने सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
नगर निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप
संगठन का आरोप है कि जिंसी स्लॉटर हाउस का टेंडर और वहां की निगरानी प्रक्रिया पूरी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। उनका दावा है कि निगम के अधिकारी और ठेकेदार मिलकर अवैध रूप से गोवंश का वध करवा रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि केवल छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन रसूखदारों को भी पकड़ा जाए जो इस तस्करी नेटवर्क को संरक्षण दे रहे हैं। उन्होंने नगर निगम की कार्यप्रणाली को ‘पंगु’ करार दिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी जांच की मांग दोहराई।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
स्थिति बेकाबू होते देख जिला प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए हल्के बल का प्रयोग भी किया। बाद में, पुलिस ने कई प्रमुख कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और उन्हें बस में भरकर मौके से दूर ले जाया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और बिना अनुमति के प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने वालों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा रही है। महापौर आवास के आसपास अब भारी पुलिस बल तैनात है और इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
राजनीतिक गर्माहट और आगामी रणनीति
इस घटना ने भोपाल की राजनीति में उबाल ला दिया है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष इसे राजनीति से प्रेरित बता रहा है, वहीं हिंदूवादी संगठन और विपक्ष ने इस मुद्दे पर महापौर को घेरना शुरू कर दिया है। हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और स्लॉटर हाउस का लाइसेंस रद्द नहीं किया गया, तो वे ‘भोपाल बंद’ का आह्वान करेंगे। आने वाले दिनों में यह मुद्दा नगर निगम की बैठकों में भी हंगामे का कारण बनेगा, जिससे शहर का सियासी पारा चढ़ना तय है।














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