एम्स (AIIMS) भोपाल द्वारा कैंसर पर किया गया हालिया शोध चिकित्सा जगत और आम जनता के बीच काफी चर्चा में है। यह शोध विशेष रूप से कैंसर के जैविक कारणों और जीवनशैली (Lifestyle) के आपसी संबंध पर केंद्रित है।
नींद की कमी और कैंसर का संबंध (Circadian Rhythm)
एम्स भोपाल के शोधकर्ताओं ने पाया है कि नींद की कमी (Sleep Deprivation) शरीर की जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) को बिगाड़ देती है।
- जब हम पर्याप्त नींद नहीं लेते, तो शरीर में मौजूद ‘सप्रेसर जींस’ (जो कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकते हैं) निष्क्रिय होने लगते हैं।
- इसके विपरीत, ‘ओंकोजीन्स’ (जो कैंसर को बढ़ावा देते हैं) अधिक सक्रिय हो जाते हैं।
मेटाबॉलिज्म और जीन म्यूटेशन
शोध में यह भी सामने आया है कि खराब खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता के कारण शरीर के मेटाबॉलिज्म में बदलाव आता है।
- यह बदलाव कोशिकाओं के DNA में म्यूटेशन (उत्परिवर्तन) पैदा करता है।
- एम्स के वैज्ञानिकों ने कुछ विशिष्ट प्रोटीन्स की पहचान की है जो कैंसर कोशिकाओं के प्रसार (Metastasis) में मदद करते हैं। इन प्रोटीन्स को लक्षित करके भविष्य में नई दवाएं बनाई जा सकती हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग
एम्स भोपाल अब कैंसर के शुरुआती पता लगाने (Early Detection) के लिए AI टूल्स का विकास कर रहा है।
- शोध का एक हिस्सा यह है कि कैसे रेडियोलॉजी इमेज (X-ray, MRI) को AI के जरिए स्कैन करके बहुत शुरुआती चरण में कैंसर की गांठ को पहचाना जा सके, जो मानवीय आंखों से ओझल हो सकती है।
4. ओरल और ब्रेस्ट कैंसर पर विशेष ध्यान
चूंकि मध्य प्रदेश और विशेष रूप से भोपाल में ओरल कैंसर (तंबाकू के कारण) और महिलाओं में ब्रेस्त कैंसर के मामले अधिक हैं, इसलिए शोध का एक बड़ा हिस्सा इन दो श्रेणियों पर केंद्रित है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि स्थानीय पर्यावरण और खान-पान भी इन विशिष्ट कैंसरों के जोखिम को बढ़ा रहे हैं।
शोध का महत्व और निष्कर्ष
एम्स भोपाल के निदेशक के अनुसार, यह शोध केवल अकादमिक नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ‘प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी’ (कैंसर से बचाव) को बढ़ावा देना है।
मुख्य संदेश: अच्छी नींद (7-8 घंटे), तनाव मुक्त जीवन और सही समय पर भोजन केवल मानसिक शांति के लिए नहीं, बल्कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को रोकने के लिए भी अनिवार्य हैं।














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