मध्यप्रदेश बजट 2026-27: आत्मनिर्भरता और समृद्धि की ओर बढ़ते कदम

बजट का ऐतिहासिक आकार और वित्तीय लक्ष्य

मध्य प्रदेश सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश करने की तैयारी में है। वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस बार बजट का कुल आकार लगभग ₹4.80 लाख करोड़ होने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के ₹4.21 लाख करोड़ के बजट की तुलना में लगभग ₹60,000 करोड़ की भारी बढ़ोतरी दर्शाता है। सरकार का मुख्य लक्ष्य 2028 तक राज्य के बजट को ₹7 लाख करोड़ के पार ले जाना है। इस बजट में राजस्व संग्रह बढ़ाने और केंद्र सरकार से मिलने वाले करों के हिस्से (Devolution) पर विशेष निर्भरता रहेगी, ताकि विकास योजनाओं की गति को बरकरार रखा जा सके।

‘कृषि कल्याण वर्ष 2026’ और किसान समृद्धि

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2026 को ‘कृषि कल्याण वर्ष’ के रूप में घोषित किया है, जिसका सीधा प्रतिबिंब इस बजट में देखने को मिलेगा। सरकार का विजन ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ को साकार करना है। बजट में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं, ताकि 2029 तक राज्य की सिंचित भूमि को 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाया जा सके। इसके अलावा, किसानों को आधुनिक तकनीक, जैसे ड्रोन सेवाओं और हाई-टेक हॉर्टिकल्चर से जोड़ने के लिए सब्सिडी और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए बड़ी राशि आवंटित की जाएगी। प्राकृतिक खेती और जैविक उत्पादों के विपणन पर भी जोर रहेगा।

रोजगार सृजन और युवा शक्ति पर फोकस

इस बजट का एक बड़ा हिस्सा युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने पर केंद्रित होगा। सरकार ‘जी-राम-जी’ (G-RAM-G) योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर नौकरियां पैदा करने की योजना बना रही है। बजट में स्टार्टअप्स और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष फंड का प्रावधान किया जा सकता है। इसके साथ ही, कौशल विकास केंद्रों (Skill Development Centers) के आधुनिकीकरण और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को नई तकनीक से लैस करने के लिए अतिरिक्त निवेश किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निजी निवेश को आकर्षित कर युवाओं के लिए लाखों नए अवसर खोलना है।

रोलिंग बजट और नई राजकोषीय नीति

मध्य प्रदेश इस बार एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए ‘रोलिंग बजट’ (Rolling Budget) प्रणाली अपनाने जा रहा है। इसका मतलब है कि बजट केवल एक वर्ष के लिए नहीं, बल्कि अगले तीन वर्षों के अनुमानित लक्ष्यों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। इससे विभागों को दीर्घकालिक परियोजनाओं की योजना बनाने और उनके प्रदर्शन के आधार पर बजट में संशोधन करने की सुविधा मिलेगी। यह नई व्यवस्था राजकोषीय अनुशासन और पारदर्शिता लाने में मील का पत्थर साबित होगी। सरकार पुरानी और कम प्रभावी योजनाओं को बंद कर संसाधनों का सही दिशा में उपयोग करने की रणनीति पर भी काम कर रही है।

अधोसंरचना और मेगा प्रोजेक्ट्स में निवेश

राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बजट में भारी पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) का प्रावधान है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए सरकार ने केंद्र से ₹20,000 करोड़ की विशेष सहायता मांगी है, जिसका हिस्सा इस बजट में बुनियादी सुविधाओं के लिए आवंटित होगा। इसके अलावा, मेट्रो प्रोजेक्ट्स, नए एक्सप्रेस-वे और ‘एआई सिटी’ (AI City) जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स के लिए फंड सुनिश्चित किया जाएगा। शहरों को स्लम-मुक्त बनाने और इलेक्ट्रिक बसों के परिचालन को बढ़ावा देने के लिए भी शहरी विकास बजट में 15-20% की वृद्धि होने की संभावना है, जिससे नागरिकों का जीवन स्तर बेहतर होगा।

महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण

नारी शक्ति को सशक्त बनाने के उद्देश्य से ‘लाड़ली बहना योजना’ के लिए इस बार बजट में ₹20,000 करोड़ से अधिक का प्रावधान होने की उम्मीद है। सरकार महिलाओं को न केवल आर्थिक सहायता दे रही है, बल्कि उन्हें अटल पेंशन योजना जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से भी जोड़ रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी बजट में लगभग ₹25,000 करोड़ आवंटित किए जा सकते हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार और नए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण पूरा किया जा सके। इसके साथ ही, आदिवासी समुदायों के लिए शिक्षा और पोषण संबंधी योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विशेष फंड सुरक्षित रखा जाएगा।

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