“मोहन कैबिनेट का मास्टरस्ट्रोक: सवा लाख शिक्षकों की सैलरी में ₹5,000 तक का बंपर इजाफा!”

कैबिनेट की ऐतिहासिक मंजूरी और लाभार्थियों की संख्या

मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के शिक्षकों के लिए ‘चतुर्थ समयमान वेतनमान’ (Fourth Time Scale Pay) के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगा दी गई है। इस निर्णय से भोपाल सहित पूरे मध्य प्रदेश के करीब 1.25 लाख से 1.50 लाख शिक्षक सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। यह मांग पिछले कई वर्षों से लंबित थी, जिसे सरकार ने नए साल और मकर संक्रांति के तोहफे के रूप में पूरा किया है। इस फैसले के बाद स्कूल शिक्षा विभाग के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षकों में खुशी की लहर है।

वेतन में वृद्धि और आर्थिक लाभ का स्वरूप

इस नई नीति के लागू होने से शिक्षकों के मासिक वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाएगी। आधिकारिक आंकड़ों और विभागीय अनुमानों के अनुसार, चतुर्थ समयमान मिलने के बाद शिक्षकों की सैलरी में ₹3,000 से ₹5,000 प्रति माह तक की बढ़ोतरी होगी। कुछ वरिष्ठ संवर्गों के लिए यह लाभ ₹7,000 तक भी जा सकता है। सरकार के इस कदम से उन शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है जो पिछले कई महीनों से समयमान वेतनमान न मिलने के कारण आर्थिक नुकसान झेल रहे थे। अब उन्हें पदोन्नति के समान ही वित्तीय लाभ प्राप्त होगा।

पात्रता की शर्तें और सेवा अवधि का मानक

चतुर्थ समयमान वेतनमान का लाभ केवल उन्हीं शिक्षकों को मिलेगा जिन्होंने अपनी सेवा के 35 वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। यह लाभ उन शिक्षकों, व्याख्याताओं, प्राचार्यों और सहायक संचालकों को दिया जाएगा जो वर्तमान में ‘तृतीय समयमान वेतनमान’ प्राप्त कर रहे थे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति सीधी भर्ती के माध्यम से हुई थी और जिन्होंने लंबी सेवा अवधि पूरी कर ली है, वे प्राथमिकता के आधार पर इस वेतन वृद्धि के हकदार होंगे। शिक्षा विभाग जल्द ही इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश और पात्रता सूची जारी करेगा।

सरकारी खजाने पर वित्तीय भार और बजट आवंटन

शिक्षकों के वेतन में इस भारी भरकम वृद्धि से मध्य प्रदेश सरकार के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। अनुमान के मुताबिक, इस निर्णय को लागू करने के लिए राज्य सरकार को सालाना करीब ₹312 करोड़ का अतिरिक्त खर्च वहन करना होगा। मुख्यमंत्री ने बैठक में स्पष्ट किया कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और गुरुओं का सम्मान बनाए रखने के लिए यह निवेश अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए 2025-26 के संशोधित बजट और आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में पर्याप्त प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं ताकि भुगतान में कोई देरी न हो।

मुख्यमंत्री का 5 सितंबर का वादा हुआ पूरा

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पिछले वर्ष 5 सितंबर 2025 (शिक्षक दिवस) के अवसर पर भोपाल के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में इस वेतनमान को लागू करने की घोषणा की थी। आज की कैबिनेट बैठक ने उस वादे को प्रशासनिक और कानूनी रूप दे दिया है। मुख्यमंत्री ने कैबिनेट ब्रीफिंग में कहा कि “गुरु का स्थान भारतीय परंपरा में सर्वोपरि है” और यह वेतन वृद्धि उनकी निष्ठावान सेवा का सम्मान है। सरकार का मानना है कि इस कदम से शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा, जिसका सीधा सकारात्मक असर प्रदेश की स्कूली शिक्षा और परीक्षा परिणामों पर पड़ेगा।

अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं और भविष्य की योजना

वेतन वृद्धि के साथ-साथ कैबिनेट ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अन्य बड़े निर्णय भी लिए हैं। बैठक में प्रदेश भर में 200 नए सांदीपनि विद्यालय खोलने और सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए फंड जारी करने पर सहमति बनी। साथ ही, 13 जनवरी से शुरू हो रहे ‘संकल्प से सिद्धि तक’ अभियान के तहत शिक्षकों की अन्य लंबित समस्याओं के निराकरण के लिए भी जिला स्तर पर शिविर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षकों के संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ‘शिक्षक कल्याण’ की दिशा में मील का पत्थर बताया है।

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