अभियान का भव्य शुभारंभ और विवेकानंद जयंती का संगम
स्वामी विवेकानंद की जयंती, जिसे हम राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाते हैं, आज भोपाल सहित पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक दिन बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर ‘संकल्प से समाधान’ अभियान का विधिवत आगाज किया। विवेकानंद जी के ‘उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको’ के संदेश को आत्मसात करते हुए, सरकार ने प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति की समस्याओं को हल करने का संकल्प लिया है। यह पहल केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास का नया सेतु बनाने की कोशिश है।
सीधे द्वार तक पहुंचेगा प्रशासन: घर-घर जाकर सुनवाई
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कार्यप्रणाली है। अब आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, बल्कि प्रशासन स्वयं जनता के द्वार पर दस्तक देगा। अभियान के तहत नियुक्त किए गए नोडल अधिकारी और कर्मचारी वार्ड और गांवों में घर-घर जाकर लोगों से मिलेंगे। वे न केवल नई शिकायतों के आवेदन लेंगे, बल्कि पुरानी लंबित समस्याओं की वर्तमान स्थिति की भी जांच करेंगे। इस ‘डोर-टू-डोर’ संपर्क का मुख्य उद्देश्य उन बुजुर्गों और दिव्यांगों की मदद करना है जो शारीरिक रूप से कार्यालय तक पहुंचने में असमर्थ हैं।
सरकारी योजनाओं का लाभ और त्वरित निराकरण
‘संकल्प से समाधान’ अभियान का प्राथमिक उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की जनहितैषी योजनाओं को प्रभावी बनाना है। अक्सर देखा जाता है कि पात्र होने के बावजूद कई लोग तकनीकी कारणों या जानकारी के अभाव में लाडली बहना, उज्ज्वला या किसान कल्याण जैसी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। इस अभियान के माध्यम से अधिकारी मौके पर ही दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे और तकनीकी त्रुटियों को सुधारेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि 15 फरवरी तक चलने वाले इस विशेष चरण में कम से कम 90% प्राप्त शिकायतों का निराकरण ऑन-द-स्पॉट (मौके पर ही) कर दिया जाए।
15 फरवरी तक चलेगा विशेष शिविरों का सिलसिला
यह अभियान एक दिन की गतिविधि नहीं है, बल्कि एक महीने से अधिक समय तक चलने वाला एक सघन मिशन है। आज से शुरू होकर यह सिलसिला 15 फरवरी तक निरंतर जारी रहेगा। इस दौरान प्रत्येक जिले में विशेष ‘समाधान शिविर’ आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में राजस्व, स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि विभाग के आला अधिकारी मौजूद रहेंगे। समय सीमा निर्धारित होने के कारण अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शिकायतों के निराकरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी जाएगी।
डिजिटल निगरानी और पारदर्शी फीडबैक सिस्टम
अभियान को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का भरपूर उपयोग किया जा रहा है। घर-घर से लिए गए प्रत्येक आवेदन को एक विशेष पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा, जिससे आवेदनकर्ता अपने फोन पर ही शिकायत की स्थिति ट्रैक कर सकेगा। इसके अलावा, समाधान के बाद विभाग द्वारा संबंधित नागरिक से फीडबैक भी लिया जाएगा। यदि नागरिक समाधान से संतुष्ट नहीं है, तो उस मामले को उच्च स्तरीय जांच के लिए भेजा जाएगा। यह डिजिटल निगरानी सुनिश्चित करेगी कि फाइलें दफ्तरों की अलमारियों में दबने के बजाय समाधान तक पहुंचें।
जन-भागीदारी और सुशासन का वास्तविक स्वरूप
किसी भी सरकारी अभियान की सफलता जनता की भागीदारी पर निर्भर करती है। ‘संकल्प से समाधान’ अभियान के माध्यम से सरकार ने नागरिकों को प्रशासन का सक्रिय हिस्सा बनने का मौका दिया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी इस मुहिम से जोड़ा गया है ताकि वे लोगों को जागरूक कर सकें। यह कदम ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के सिद्धांत को धरातल पर उतारने जैसा है। भोपाल से शुरू हुई यह लहर यदि सफल रहती है, तो यह आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए सुशासन का एक बेहतरीन मॉडल साबित हो सकती है।















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