महाभारत समागम: भारत भवन में जीवंत हुई कुरुक्षेत्र की गाथा

भोपाल की सांस्कृतिक धरोहर भारत भवन एक बार फिर इतिहास, दर्शन और कला के अद्भुत संगम का गवाह बन रहा है। यहाँ आयोजित नौ दिवसीय ‘महाभारत समागम’ अपने मध्य पड़ाव पर पहुँच चुका है, जिसने राजधानी के कला प्रेमियों को पूरी तरह अपनी ओर आकर्षित कर लिया है।

आज, 17 जनवरी 2026 को इस समागम में विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और नाटकों का आयोजन किया जा रहा है, जो ‘महाभारत’ के अनछुए पहलुओं को दर्शकों के सामने पेश कर रहे हैं।

कला और आध्यात्म का अनूठा संगम

‘महाभारत समागम’ का उद्देश्य केवल एक पौराणिक कथा को दोहराना नहीं है, बल्कि आधुनिक संदर्भों में इसके पात्रों के द्वंद्व, नैतिकता और धर्म की व्याख्या करना है। भारत भवन के विभिन्न मंचों (जैसे अंतरंग और वागर्थ) पर देश के प्रतिष्ठित रंगकर्मी, नर्तक और विद्वान एकत्रित हुए हैं।

आज के कार्यक्रमों की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • नाट्य प्रस्तुति ‘चक्रव्यूह’: आज शाम के मुख्य आकर्षण में ‘चक्रव्यूह’ नाटक का मंचन है। यह नाटक न केवल अभिमन्यु के पराक्रम को दिखाता है, बल्कि यह मनुष्य के जीवन में आने वाली उन परिस्थितियों का भी चित्रण करता है जहाँ से निकलना असंभव प्रतीत होता है। इसमें प्रकाश व्यवस्था और पार्श्व संगीत का ऐसा तालमेल बिठाया गया है कि दर्शक स्वयं को कुरुक्षेत्र के मैदान में महसूस कर रहे हैं।
  • नृत्य नाटिका (Kathak & Chhau): शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से द्रौपदी के चीर-हरण और कृष्ण के विराट रूप की कथा को प्रस्तुत किया गया। छऊ नृत्य की ऊर्जा और कथक के भावपूर्ण अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

विद्वानों का संवाद: ‘वर्तमान समय में महाभारत’

समागम के बौद्धिक सत्र ‘वागर्थ’ में आज देश के जाने-माने साहित्यकारों ने “महाभारत: एक शाश्वत दर्पण” विषय पर चर्चा की। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि महाभारत केवल एक युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि यह ‘मैनेजमेंट’, ‘मनोविज्ञान’ और ‘राजनीति’ का सबसे बड़ा ग्रंथ है।

चर्चा के मुख्य बिंदु:

  1. कर्ण का संघर्ष: सामाजिक न्याय और योग्यता बनाम अधिकार का मुद्दा।
  2. गांधारी का त्याग: वर्तमान युग में नैतिकता के प्रति प्रतिबद्धता।
  3. श्रीकृष्ण का कूटनीतिक कौशल: संघर्ष के समय सही निर्णय लेने की क्षमता।

युवाओं का बढ़ता रुझान

इस आयोजन में सबसे सुखद पहलू यह है कि भोपाल के युवाओं की भारी भीड़ यहाँ देखी जा रही है। डिजिटल युग में, जहाँ सामग्री संक्षिप्त होती जा रही है, युवा पीढ़ी महाभारत के विस्तृत कैनवास को समझने के लिए उत्सुक दिखी। भारत भवन की गैलरी में महाभारत के विभिन्न प्रसंगों पर आधारित पेंटिंग्स और मूर्तियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जो दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

भारत भवन: सांस्कृतिक चेतना का केंद्र

भारत भवन हमेशा से ही प्रयोगधर्मी कलाओं का केंद्र रहा है। इस नौ दिवसीय समागम के माध्यम से प्रशासन और संस्कृति विभाग ने यह सिद्ध किया है कि हमारी प्राचीन विरासत आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। समागम के दौरान आयोजित ‘यक्ष प्रश्न’ आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में भी स्थानीय स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

आगामी कार्यक्रम

यह समागम अगले कुछ दिनों तक जारी रहेगा, जिसमें आने वाले दिनों में प्रसिद्ध लोक गायकों द्वारा ‘पांडवानी’ गायन और भीष्म पितामह के जीवन पर आधारित एकल नाटकों की प्रस्तुति होगी। समापन समारोह में ‘शांति पर्व’ के संदेशों के साथ विश्व शांति की प्रार्थना की जाएगी।

निष्कर्ष

‘महाभारत समागम’ केवल एक आयोजन नहीं है, बल्कि यह स्वयं को खोजने की एक यात्रा है। भारत भवन के गलियारों में गूंजते शंखनाद और पात्रों के संवाद भोपाल की फिजाओं में एक अलग ही गंभीरता और गरिमा भर रहे हैं। यदि आप कला, साहित्य और इतिहास में रुचि रखते हैं, तो आज की शाम भारत भवन में बिताना आपके लिए एक यादगार अनुभव साबित होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *