ऐतिहासिक फैसला: भीमबेटका और रातापानी अब ‘डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर’ के नाम से जाने जाएंगे!

ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान यह महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की धरती महान विभूतियों की कर्मस्थली रही है और उनके योगदान को सम्मान देना सरकार की प्राथमिकता है। भीमबेटका जैसी विश्व धरोहर और रातापानी टाइगर रिजर्व को अब ‘डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर’ के नाम से जाना जाएगा, जिन्होंने इस क्षेत्र की वैश्विक पहचान स्थापित करने में मुख्य भूमिका निभाई थी।

डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर का योगदान

डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर को भारतीय पुरातत्व का ‘पितामह’ माना जाता है। उन्होंने वर्ष 1957 में भीमबेटका की गुफाओं और वहां मौजूद शैलचित्रों (Rock Paintings) की खोज की थी। यह खोज विश्व इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई, क्योंकि इसने मानव सभ्यता के क्रमिक विकास के प्रमाणों को दुनिया के सामने रखा। उनके इसी अटूट समर्पण और शोध कार्य को श्रद्धांजलि देने के लिए नाम परिवर्तन का यह निर्णय लिया गया है।

भीमबेटका: एक विश्व धरोहर स्थल

भीमबेटका भोपाल से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित है और इसे यूनेस्को (UNESCO) द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया जा चुका है। यहाँ 750 से अधिक रॉक शेल्टर हैं, जिनमें से कई में हजारों साल पुराने चित्र बने हुए हैं। नाम बदलने के इस कदम से पर्यटन क्षेत्र में डॉ. वाकणकर के नाम की गूंज वैश्विक स्तर पर और अधिक बढ़ेगी और आने वाली पीढ़ियां उनके शोध कार्यों से परिचित हो सकेंगी।

रातापानी टाइगर रिजर्व पर प्रभाव

रातापानी टाइगर रिजर्व, जो भोपाल और रायसेन जिले की सीमा पर स्थित है, जैव विविधता का एक प्रमुख केंद्र है। यह क्षेत्र न केवल बाघों के संरक्षण के लिए जाना जाता है, बल्कि भीमबेटका की गुफाएं भी इसी वन क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं। अब पूरे रिजर्व को डॉ. वाकणकर के नाम से जोड़े जाने से इस क्षेत्र की वैज्ञानिक और पुरातात्विक महत्ता को एक एकीकृत पहचान मिलेगी।

सांस्कृतिक पहचान का पुनरुद्धार

राज्य सरकार का तर्क है कि स्थानों के नाम उन महापुरुषों पर होने चाहिए जिन्होंने उस स्थान को पहचान दिलाई। मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि डॉ. वाकणकर ने न केवल भीमबेटका की खोज की, बल्कि उन्होंने लुप्त हो चुकी सरस्वती नदी के मार्ग को खोजने में भी अपना जीवन समर्पित कर दिया था। इस निर्णय को मध्य प्रदेश की “सांस्कृतिक पहचान के पुनरुद्धार” के रूप में देखा जा रहा है।

पर्यटन और शिक्षा में बदलाव

इस नाम परिवर्तन के बाद अब पर्यटन विभाग के साइनबोर्ड, आधिकारिक दस्तावेजों और शैक्षणिक पाठ्यपुस्तकों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे छात्रों और पर्यटकों को भीमबेटका के इतिहास के साथ-साथ उसे खोजने वाले व्यक्तित्व के बारे में भी जानकारी मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे “हेरिटेज टूरिज्म” (विरासत पर्यटन) को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

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