मध्यप्रदेश में खेती का नया सवेरा: वर्ष 2026 बना ‘कृषि संकल्प वर्ष’

ऐतिहासिक घोषणा और विजन

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 26 जनवरी 2026 को लाल परेड मैदान से प्रदेश की जनता को संबोधित करते हुए वर्ष 2026 को आधिकारिक तौर पर ‘कृषि वर्ष’ घोषित किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश को भारत के ‘एग्रीकल्चर हब’ के रूप में स्थापित करना है। राज्य सरकार का मानना है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान हैं, और उन्हें सशक्त बनाकर ही विकसित मध्यप्रदेश का सपना पूरा किया जा सकता है। इस घोषणा के तहत सरकार केवल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि किसानों की आय को दोगुना करने के नए वैज्ञानिक तरीकों और बाजार की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर केंद्रित रहेगी।

कृषि बजट में अभूतपूर्व वृद्धि

कृषि वर्ष को सफल बनाने के लिए सरकार ने वित्तीय ढांचे को भी मजबूती प्रदान की है। इस वर्ष के लिए कृषि और उससे संबद्ध क्षेत्रों के बजट को बढ़ाकर ₹27,000 करोड़ से अधिक कर दिया गया है। यह निवेश सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार, नई अनाज मंडियों के आधुनिकीकरण और बीज अनुसंधान केंद्रों की स्थापना पर खर्च किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर खेत पानी और हर किसान खाद-बीज की कमी से मुक्त रहे। यह बजट आवंटन दर्शाता है कि प्रदेश सरकार तकनीक और परंपरा के मेल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नई क्रांति लाने की तैयारी कर चुकी है।

‘मिल्क कैपिटल’ और पशुपालन पर जोर

कृषि वर्ष 2026 के अंतर्गत मध्यप्रदेश को देश की ‘मिल्क कैपिटल’ यानी दूध की राजधानी बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पशुपालकों को रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा और उन्नत नस्ल के पशुओं के संरक्षण के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे। गौशालाओं को मिलने वाले सरकारी अनुदान को दोगुना (₹20 से बढ़ाकर ₹40 प्रति गाय) करना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। दुग्ध उत्पादन बढ़ने से न केवल किसानों की अतिरिक्त आय सुनिश्चित होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे युवाओं का शहरों की ओर पलायन कम होगा।

जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण

सरकार ने इस विशेष वर्ष में ‘जैविक और प्राकृतिक खेती’ को बढ़ावा देने का संकल्प लिया है। रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते प्रयोग को रोकने के लिए किसानों को जैविक खाद के लाभों के प्रति जागरूक किया जाएगा। नर्मदा नदी के किनारों पर प्राकृतिक खेती के कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो। ‘कृषि वर्ष’ के तहत जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण और उनकी वैश्विक स्तर पर ब्रांडिंग के लिए अलग से फंड आवंटित किया गया है, जिससे एमपी के किसानों के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रीमियम कीमतों पर बिक सकें।

कृषि में अत्याधुनिक तकनीक का समावेश

तकनीक के इस दौर में मध्यप्रदेश सरकार खेती को ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर’ में बदलने की योजना बना रही है। ‘कृषि वर्ष’ के दौरान प्रदेश भर के गांवों में कृषि-ड्रोन के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे कीटनाशकों का छिड़काव सटीक और सुरक्षित तरीके से हो सके। इसके साथ ही, मिट्टी परीक्षण के लिए डिजिटल सॉइल हेल्थ कार्ड की सुविधा हर किसान को घर बैठे मिलेगी। मोबाइल एप्स के माध्यम से मौसम की सटीक भविष्यवाणी और बाजार भाव की जानकारी रियल-टाइम में उपलब्ध कराई जाएगी। यह डिजिटल क्रांति किसानों को बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कर उन्हें सीधे बाजार से जोड़ने का काम करेगी।

किसान कल्याण और सामाजिक सुरक्षा

अंततः, ‘कृषि वर्ष 2026’ का सबसे महत्वपूर्ण पहलू किसान का सामाजिक सम्मान और सुरक्षा है। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत दावों का निपटारा अब और भी तेज गति से किया जाएगा। सरकार ने घोषणा की है कि किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राहत राशि का वितरण अब पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होगा। इसके अलावा, किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ाने और सहकारी बैंकों के माध्यम से शून्य ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। यह वर्ष किसान के पसीने की सही कीमत दिलाने और उसके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का संकल्प है।

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