“राजगढ़-रायसेन के खेतों में बरसेगी खुशहाली: ₹898 करोड़ से प्यासी धरती की बुझेगी प्यास, कैबिनेट का बड़ा फैसला”

मोहनपुरा विस्तार परियोजना: राजगढ़ के किसानों को बड़ी सौगात

कैबिनेट ने राजगढ़ जिले की मोहनपुरा विस्तार (सारंगपुर) सिंचाई परियोजना के लिए ₹396.21 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। यह परियोजना राजगढ़ की कृषि व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली साबित होगी। इस विस्तार योजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के उन हिस्सों तक पानी पहुँचाना है जो अब तक सिंचाई सुविधाओं से वंचित थे। आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से पाइपलाइन नेटवर्क और वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए किया जाएगा, ताकि सिंचाई के पानी की बर्बादी कम हो और अंतिम छोर के खेत तक पानी पहुँच सके।

हजारों किसान परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ और आर्थिक संबल

राजगढ़ जिले की इस विशेष परियोजना से सारंगपुर तहसील के 26 गाँवों की लगभग 11,040 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना से सीधे तौर पर 10,400 किसान परिवारों को लाभ मिलेगा। पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलने से किसान अब साल में दो से तीन फसलें ले सकेंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। यह कदम क्षेत्र में कृषि आधारित रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा, जिससे युवाओं का शहरों की ओर पलायन कम होने की उम्मीद है।

रायसेन की बारना उद्वहन परियोजना: सिंचाई का नया आधार

रायसेन जिले के लिए भी कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए बारना उद्वहन सिंचाई परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना की कुल लागत ₹386.22 करोड़ निर्धारित की गई है। बारना बांध से पानी को लिफ्ट (उद्वहन) कर ऊँचाई वाले क्षेत्रों और दूर-दराज के खेतों तक पहुँचाया जाएगा। यह परियोजना रायसेन की बरेली तहसील के लिए जीवनरेखा साबित होगी। लंबे समय से इस क्षेत्र के किसान पानी की कमी से जूझ रहे थे, लेकिन इस भारी-भरकम बजट की स्वीकृति के बाद अब उनके खेतों में हरियाली लौटने का रास्ता साफ हो गया है।

बरेली तहसील के 36 गाँवों का कायाकल्प

बारना उद्वहन परियोजना के माध्यम से रायसेन की बरेली तहसील के 36 गाँवों की 15,000 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस परियोजना का लाभ लगभग 6,800 किसान परिवारों को मिलेगा। उद्वहन सिंचाई तकनीक का लाभ यह है कि इसके लिए पारंपरिक नहरों की तुलना में कम जमीन का अधिग्रहण करना पड़ता है और पानी का दबाव अधिक होने से सिंचाई अधिक प्रभावी ढंग से होती है। इससे न केवल गेहूं और चने जैसी रबी फसलों का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसान नकदी फसलों की ओर भी प्रेरित होंगे।

सुल्तानपुर लिफ्ट सिंचाई परियोजना: रायसेन के लिए अतिरिक्त लाभ

रायसेन जिले के लिए एक और महत्वपूर्ण घोषणा सुल्तानपुर लिफ्ट सिंचाई परियोजना के रूप में की गई है, जिसके लिए ₹115 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस योजना का मुख्य केंद्र सुल्तानपुर क्षेत्र के वे गाँव हैं जो अब तक किसी भी बड़ी सिंचाई परियोजना के दायरे में नहीं आते थे। इस परियोजना के माध्यम से क्षेत्र के 20 गाँवों की 5,700 हेक्टेयर भूमि को सिंचित किया जाएगा। इससे लगभग 3,100 किसान परिवारों को लाभ मिलेगा। इस तरह रायसेन जिले के लिए मंजूर किए गए कुल बजट से जिले के एक बड़े कृषि क्षेत्र की पानी की समस्या का स्थायी समाधान होने जा रहा है।

ई-कैबिनेट और आधुनिक कृषि अवसंरचना का संगम

विशेष बात यह है कि इन सभी परियोजनाओं को मध्य प्रदेश की पहली ई-कैबिनेट (पेपरलेस) बैठक के माध्यम से मंजूरी दी गई, जो शासन की पारदर्शिता और गति को दर्शाता है। ₹898 करोड़ की ये संयुक्त योजनाएं भोपाल संभाग के इन दो प्रमुख जिलों में कुल 31,000 हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त भूमि को सिंचित करेंगी। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2026 के अंत तक इन परियोजनाओं के मुख्य कार्यों को पूरा कर लिया जाए। यह निवेश न केवल राज्य के कृषि उत्पादन को बढ़ाएगा, बल्कि ‘हर खेत को पानी’ के संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

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