ऐतिहासिक विरासत और स्वाद का अनूठा संगम
भोपाल के हृदय स्थल मिंटो हॉल में आयोजित इस फूड फेस्टिवल ने शहर की नवाबी विरासत और आधुनिक खान-पान की संस्कृति को एक साथ पिरोया है। 26 जनवरी के उपलक्ष्य में सजे इस मेले में पहुँचते ही आगंतुकों का स्वागत भुनी हुई मसालों की खुशबू और पुराने भोपाल के पारंपरिक ज़ायके से होता है। यह आयोजन न केवल स्वाद का उत्सव है, बल्कि यह भोपाल की उस तहजीब को भी प्रदर्शित करता है जहाँ भोजन को केवल पेट भरने का माध्यम नहीं, बल्कि एक कला माना जाता है। इस बार उत्सव की थीम ‘विरासत और स्वाद’ रखी गई है, जो यहाँ आने वाले हर पर्यटक को लुभा रही है।
पारंपरिक भोपाली व्यंजनों का मुख्य आकर्षण
फेस्टिवल का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु भोपाल का प्रसिद्ध ‘नवाबी जायका’ रहा। यहाँ के स्टॉल्स पर पारंपरिक भोपाली रिजाला, मुर्ग मुसल्लम और विशेष रूप से तैयार किया गया ‘अचार गोश्त’ लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। पुराने शहर के मशहूर शेफ ने अपनी गुप्त रेसिपी के साथ इन व्यंजनों को तैयार किया है। केवल मांसाहारी ही नहीं, बल्कि शाकाहारी व्यंजनों में भी भोपाल की खास ‘नमक वाली चाय’ और ‘समर कुलचा’ का लुत्फ उठाने के लिए लंबी कतारें देखी गईं। शुद्ध देसी घी से बनी मिठाइयों और शाही टुकड़ा ने मीठे के शौकीनों को अपनी ओर आकर्षित किया।
स्ट्रीट फूड और आधुनिक फ्यूजन का तड़का
मिंटो हॉल के गलियारों में केवल पारंपरिक व्यंजन ही नहीं, बल्कि भोपाल के मशहूर स्ट्रीट फूड जैसे चटोरे चटोरे चाट, पोहा-जलेबी और विशेष इंदौरी सराफा स्टाइल के व्यंजनों के स्टॉल्स भी लगाए गए हैं। युवा पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए इस साल कई ‘फ्यूजन फूड’ स्टॉल्स भी शामिल किए गए हैं, जहाँ पारंपरिक समोसे को मैक्सिकन टच दिया गया है या बिरयानी को इटालियन मसालों के साथ परोसा जा रहा है। यह विविधता सुनिश्चित करती है कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी के पास अपनी पसंद का स्वाद चुनने का विकल्प मौजूद रहे।
स्थानीय स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी
इस फूड फेस्टिवल की एक खास विशेषता मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भागीदारी है। यहाँ ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं ने स्थानीय मोटे अनाजों यानी ‘मिलेट्स’ से बने उत्पादों के स्टॉल लगाए हैं। कोदो-कुटकी की खीर, ज्वार के बिस्कुट और बाजरे की खिचड़ी को लोग स्वास्थ्य के प्रति अपनी जागरूकता के चलते काफी पसंद कर रहे हैं। यह मंच इन महिलाओं को न केवल अपने कौशल के प्रदर्शन का अवसर दे रहा है, बल्कि उन्हें एक बड़ा बाजार और आर्थिक मजबूती भी प्रदान कर रहा है, जो सरकार की ‘वोकल फॉर लोकल’ पहल को सार्थक बनाता है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और जीवंत वातावरण
भोजन के साथ-साथ दर्शकों के मनोरंजन के लिए मिंटो हॉल में हर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। भोपाल के स्थानीय कलाकारों द्वारा सूफी संगीत, गजल और लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी जा रही है, जो भोजन के अनुभव को और भी यादगार बना देती है। गणतंत्र दिवस की शाम को देशभक्ति के गीतों और रोशनी से सजे मिंटो हॉल ने एक जादुई वातावरण तैयार किया। लोग न केवल खाने का स्वाद ले रहे हैं, बल्कि इस ऐतिहासिक इमारत की भव्यता के साथ अपनी तस्वीरें साझा कर सोशल मीडिया पर इस उत्सव को और अधिक लोकप्रिय बना रहे हैं।
सुरक्षा, स्वच्छता और भविष्य की राह
भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और आयोजकों ने सुरक्षा और स्वच्छता के कड़े इंतजाम किए हैं। पूरे क्षेत्र को ‘जीरो वेस्ट’ जोन घोषित किया गया है, जहाँ सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है और केवल पर्यावरण अनुकूल बर्तनों का उपयोग किया जा रहा है। प्रवेश द्वार पर कड़ी चेकिंग और पार्किंग की सुव्यवस्थित व्यवस्था ने आगंतुकों की राह आसान कर दी है। इस सफलता को देखते हुए प्रशासन इसे एक वार्षिक आयोजन बनाने पर विचार कर रहा है, ताकि भोपाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ‘फूड हब’ के रूप में पहचान दिलाई जा सके।






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