शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में एकजुटता का संदेश
नई दिल्ली के एआईसीसी मुख्यालय में आज मध्य प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सांसद राहुल गांधी कर रहे हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में पार्टी की वर्तमान स्थिति का आकलन करना और आगामी चुनावों के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार करना है। दिल्ली से आए संकेतों के अनुसार, हाईकमान अब मध्य प्रदेश में गुटबाजी को पूरी तरह खत्म कर एक नए और ऊर्जावान नेतृत्व के साथ आगे बढ़ने की योजना बना रहा है, जिसमें युवाओं को प्रमुखता दी जाएगी।
वोटर लिस्ट में धांधली और नाम कटने पर सख्त रुख
बैठक का एक प्रमुख एजेंडा मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ी और बड़े पैमाने पर विपक्षी समर्थकों के नाम काटे जाने का मुद्दा है। राहुल गांधी ने विशेष रूप से उन रिपोर्टों पर चिंता जताई है, जिनमें दावा किया गया है कि कई क्षेत्रों में कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक के नाम सूची से गायब हैं। पार्टी ने निर्णय लिया है कि प्रदेश भर के हर बूथ पर ‘वोटर लिस्ट सुधार अभियान’ चलाया जाएगा। कार्यकर्ता घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करेंगे कि पात्र मतदाताओं का नाम सूची में शामिल हो और किसी भी प्रशासनिक पक्षपात के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी जाए।
मनरेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बदहाली पर घेराव
मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में मनरेगा योजना के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को कांग्रेस ने एक बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में चुना है। बैठक में चर्चा हुई कि राज्य सरकार द्वारा बजट में कटौती और भुगतान में देरी के कारण लाखों मजदूर पलायन करने को मजबूर हैं। कांग्रेस अब इस मुद्दे को लेकर पंचायतों से लेकर राजधानी भोपाल तक बड़ा आंदोलन शुरू करने वाली है। पार्टी का लक्ष्य ग्रामीण मतदाताओं को यह समझाना है कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ केवल कांग्रेस की नीतियों के माध्यम से ही उन तक सही ढंग से पहुंच सकता है।
संगठनात्मक बदलाव और नए चेहरों को जिम्मेदारी
दिल्ली की इस बैठक में मध्य प्रदेश कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की पटकथा लिखी जा रही है। राहुल गांधी ने साफ कर दिया है कि केवल प्रदर्शन करने वाले नेताओं को ही पद पर बनाए रखा जाएगा। जिला और ब्लॉक स्तर पर नए और सक्रिय चेहरों को लाने की तैयारी है, ताकि जमीनी स्तर पर पार्टी को फिर से खड़ा किया जा सके। सूत्रों की मानें तो आगामी दिनों में प्रदेश कार्यकारिणी में फेरबदल की आधिकारिक घोषणा हो सकती है, जिसमें उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जहां पिछले चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा था।
आक्रामक विपक्षी भूमिका और जन-आंदोलन की तैयारी
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने एमपी के नेताओं को निर्देश दिया है कि वे केवल विधानसभा के भीतर ही नहीं, बल्कि सड़कों पर भी एक आक्रामक विपक्ष की भूमिका निभाएं। बैठक में तय हुआ है कि भ्रष्टाचार, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर राज्य सरकार को घेरने के लिए प्रदेशव्यापी ‘न्याय यात्रा’ के अगले चरण की शुरुआत की जाएगी। यह यात्रा हर संभाग से गुजरेगी और जनता के बीच जाकर सरकार की विफलताओं का कच्चा चिट्ठा खोलेगी। पार्टी का मानना है कि निरंतर सक्रियता ही कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का एकमात्र तरीका है।
समन्वय समिति और आगामी चुनाव का ब्लूप्रिंट
बैठक के अंतिम चरण में एक विशेष ‘समन्वय समिति’ के गठन पर सहमति बनी है, जो दिल्ली और भोपाल के बीच सेतु का काम करेगी। यह समिति हर महीने अपनी रिपोर्ट सीधे मल्लिकार्जुन खरगे को सौंपेगी। आगामी स्थानीय निकाय और अन्य उपचुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में भी अब हाईकमान का सीधा दखल रहेगा। इस महामंथन का मुख्य संदेश यही है कि कांग्रेस अब पूरी तरह ‘इलेक्शन मोड’ में आ चुकी है और 2028 के विधानसभा चुनावों की तैयारी आज से ही शुरू कर दी गई है।











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