दावोस 2026: मध्य प्रदेश का ‘ग्रीन एनर्जी’ ब्लूप्रिंट और वैश्विक सराहना

वैश्विक मंच पर ‘एमपी मॉडल’ की गूंज

दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी ने मध्य प्रदेश के सौर ऊर्जा प्रयासों की जमकर सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में “डी-रीस्किंग द ग्रीन लीप” सत्र के दौरान कहा कि मध्य प्रदेश आज सौर ऊर्जा के क्षेत्र में ‘स्केल, स्पीड और सिस्टम’ का बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा है। प्रदेश ने न केवल बड़े सौर पार्कों की स्थापना की है, बल्कि ऊर्जा के उत्पादन और वितरण में एक ऐसी पारदर्शी व्यवस्था बनाई है जिसे दुनिया भर में अपनाया जा सकता है।

15,000 मेगावाट क्षमता का लक्ष्य और भोपाल की भूमिका

मध्य प्रदेश ने साल 2026 के अंत तक अपनी हरित ऊर्जा क्षमता को 15,000 मेगावाट तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। राजधानी भोपाल इस लक्ष्य की प्राप्ति में एक रणनीतिक केंद्र के रूप में उभर रही है। भोपाल और उसके आसपास के क्षेत्रों (जैसे होशंगाबाद) में सौर पैनल, बैटरी और वेफर निर्माण के लिए औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने रेखांकित किया कि भोपाल में पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से ‘रूफटॉप सोलर’ और विकेंद्रीकृत सौर समाधानों को अपनाया गया है, वह अन्य शहरों के लिए प्रेरणा है।

‘टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक’ नीति और ब्लेंडेड फाइनेंस

दावोस में चर्चा का मुख्य विषय मध्य प्रदेश की Renewable Energy Policy 2025 रही। यह देश की पहली ऐसी नीति है जो ‘टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक’ है, यानी यह किसी एक तकनीक तक सीमित न रहकर हाइब्रिड मॉडल (विंड-सोलर) और पंप स्टोरेज को बढ़ावा देती है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वैश्विक निवेशकों को बताया कि प्रदेश ने भूमि, श्रम और ऊर्जा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर निवेश के जोखिम को कम किया है। इसके लिए ‘ब्लेंडेड फाइनेंस’ और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने वाला ड्राफ्ट फ्रेमवर्क भी पेश किया गया।

सोलर स्टोरेज और चौबीस घंटे बिजली का संकल्प

भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए, मध्य प्रदेश अब केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। राज्य के अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव ने दावोस में जानकारी दी कि एमपी अब 24 घंटे सौर ऊर्जा (Round-the-clock solar power) की दिशा में बढ़ रहा है। इसके लिए राज्य भर में बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज समाधान और पंप स्टोरेज हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया गया है। वैश्विक कंपनियों जैसे ‘ग्रीन एनर्जी-3000’ और ‘अमारा राजा ग्रुप’ के साथ इन परियोजनाओं पर विशेष चर्चा की गई।

विश्व की सबसे बड़ी सौर परियोजनाओं का नेतृत्व

केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में विशेष रूप से रीवा सौर पार्क और ओंकारेश्वर में दुनिया के सबसे बड़े फ्लोटिंग सोलर प्लांट (600 मेगावाट) का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किस तरह मध्य प्रदेश ने भारत में सबसे कम दरों पर सौर ऊर्जा उपलब्ध कराने का रिकॉर्ड बनाया है। इन परियोजनाओं ने न केवल मध्य प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की है, बल्कि दिल्ली मेट्रो जैसे बाहरी संस्थानों को भी सस्ती बिजली प्रदान कर प्रदेश को ‘एनर्जी हब’ के रूप में स्थापित कर दिया है।

आत्मनिर्भर किसान और ‘पीएम कुसुम’ का प्रभाव

दावोस में एमपी के ‘एग्रो-सोलर’ मॉडल की भी तारीफ हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि पीएम कुसुम (PM-KUSUM) योजना के माध्यम से प्रदेश के हजारों किसान अब न केवल अपनी खेती के लिए बिजली पैदा कर रहे हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली बेचकर ‘अन्नदाता से ऊर्जादाता’ बन रहे हैं। यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मील का पत्थर साबित हो रहा है। दावोस में मौजूद प्रतिनिधियों ने इसे ‘सस्टेनेबल रूरल डेवलपमेंट’ का एक प्रभावी जरिया माना।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *